जयपुर के सरकारी अस्पताल जेके लोन में भर्ती 44 दिन के एक बच्चे में दो दुर्लभ बीमारियां मिली हैं। उसमें पॉम्पे डिसीज और स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी-1 का पता चला है। डॉक्टर्स के मुताबिक, दो दुर्लभ बीमारियां एक नवजात में होने का यह दुनिया का पहला मामला है। नवजात का इलाज तीन डॉक्टरों का एक दल कर रहा है। इस दल के एक विशेषज्ञ डॉ. प्रियांशु माथुर के मुताबिक, बुधवार को बच्चे को आगरा से जयपुर लाया गया था। उसमें सांस तेज चलने के साथ पैरों में हरकत कम हो रही थी।
एक साल की दवा का खर्च करोड़ों में
डॉ. प्रियांशु माथुर के मुताबिक, बच्चे की बीमारी का इलाज शुरू कर दिया गया है। ऐसी बीमारी वाले मरीज बिना इलाज जीवित नहीं रह पाते। पॉम्पे डिसीज की दवा का एक साल का खर्च 25-30 लाख रुपए तक आता है। वहीं, स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी का खर्च 4 करोड़ रुपए सालाना तक आता है। बच्चे को दवाएं फिलहाल अनुकंपा उपयोग कार्यक्रम के जरिए उपलब्ध कराई गई हैं।
क्या है पॉम्पे और स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी
नेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेयर डिसऑर्डर के मुताबिक, पॉम्पे डिसीज एक रेयर मल्टीसिस्टम डिसऑर्डर है। इसके लक्षण जन्म से लेकर युवावस्था तक कभी भी दिख सकते हैं। इसके मरीजों में मांसपेशियों में कमजोरी, चलने-फिरने में दिक्कत, सांस लेने में तकलीफ होती है। इस बीमारी के कारण ग्लाइकोजन शरीर में ऊतकों में पहुंचकर उसे कमजोर बनाता है। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जो एक से दूसरी पीढ़ी में भी जा सकती है।
स्पाइनल मस्क्युलर एट्रॉफी के सबसे ज्यादा मामले बच्चों में सामने आते हैं। बीमारी होने पर मांसपेशियां काफी सख्त हो जाती हैं। ऐसा स्पाइनल कॉर्ड और ब्रेन में नर्व सेल के डैमेज होने से होता है। इस स्थिति में ब्रेन का संदेश मांसपेशियों को कंट्रोल करने वाले नर्व सेल्स तक नहीं पहुंच पाता।
इसके मरीजों में चलने-फिरने, गर्दन को हिलाने और उसे कंट्रोल करने में दिक्कत होती है। कई बार स्थिति बिगड़ने पर खाना निगलने और सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
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