डायबिटीज और ब्लड प्रेशर इंसान के दिमाग की संरचना बदल रहे हैं। इसलिए लोगों में सोचने की क्षमता और याद्दाश्त दोनों घट रही है। यह दावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह बदलाव ब्रेन के ग्रे और व्हाइट मैटर वाले हिस्से में हो रहा है। रिसर्च में 22 हजार से अधिक लोगों की ब्रेन स्कैनिंग की गई। इनमें 1100 डायबिटीज के मरीज भी शामिल थे।
सबसे ज्यादा असर 44 से 69 साल की उम्र में दिखता है
रिसर्च के दौरान इन लोगों की तुलना स्वस्थ लोगों के साथ की गई। दोनों की याद्दाश्त का स्तर देखा गया और रिएक्शन टाइम जांचा गया। रिसर्च में सामने आया कि हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों के दिमाग पर सबसे ज्यादा असर 44 से 69 साल की उम्र में दिखता है। 70 साल से अधिक उम्र होने पर असर उतनी तेजी से नहीं दिखता।
जैसे-जैसे बीपी बढ़ता है दिमाग की परफॉर्मेंस घटती है
नेचर कम्युनिकेशन जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, जैसे-जैसे हाई ब्लड प्रेशर बढ़ता दिमाग की परफॉर्मेंस घटती जाती है। दिमाग के काम करने की क्षमता का एक सेकंड भी धीमा होना, बुरा असर छोड़ता है।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर मसूद हुसैन के मुताबिक, रिसर्च में हमनें हृदय रोग और डायबिटीज से दिमाग पर पड़ने वाले असर को पता लगाने की कोशिश की है। इसका असर आने वाले समय में डिमेंशिया के रूप में पड़ सकता है।
प्रोफेसर मसूद हुसैन कहते हैं, दोनों ही बीमारी के रोगियों की एमआरआई के दौरान ब्रेन की संरचना जांची गई। डायबिटीज बढ़ने पर ब्रेन की नर्व डैमेज हो सकती हैं, इसलिए डिमेंशिया का रिस्क और भी बढ़ता है।
क्या होता है डिमेंशिया
डिमेंशिया भूलने की दिक्कत से अलग है। दरअसल, डिमेंशिया में हमारी सोचने-समझने की क्षमता लगातार कम होती जाती है। आम तौर पर इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे दिखते हैं और वक्त गुजरने के साथ गंभीर होते जाते हैं। इसलिए अक्सर घरवाले भी इसे नोटिस नहीं कर पाते।
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